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राजनीति के चाणक्य की तरह व्यवहार करते नजर आते हैं मुख्यमंत्री मनोहर लाल

धर्मपाल वर्मा

चंडीगढ़ । हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल राजनीति के मामले में कई बार राजनीति के पीएचडी कहे जाने वाले हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी भजन को भी मात देते नजर आते हैं। वे राजनीतिक समायोजन बड़े तरीके और सलीके से करते रहते हैं। हाल में राज्यसभा का चुनाव देख ले या कुलदीप बिश्नोई को साधने का तरीका, मुख्यमंत्री एक शिल्पकार की तरह राजनीतिक समायोजन कर इस तरह से चर्चा में आ जाते हैं कि लोग देखते ही रह जाते हैं। मौका आता है तो मास्टर स्ट्रोक भी मार जाते हैं जैसा उन्होंने सोमवार को और फिर आज सुबह मार कर दिखाया।

मुख्यमंत्री का एक मास्टर स्ट्रोक तो बड़ा सामयिक है ,और वह है अग्निवीर आंदोलन से जुड़ा। अग्निवीर भर्ती के मामले में मुख्यमंत्री ने भिवानी में योग समारोह में  घोषणा कर दी कि हरियाणा के जो युवा अग्निवीर के रूप में सेवा करके लौटेंगे उन्हें गारंटी से सरकारी नौकरी दी जाएगी। यह मास्टर स्ट्रोक इस विषय पर आंदोलनरत युवाओं और उनके परिजनों को नॉर्मल भी कर सकता है। यह समझकर कि उन्हें 4 साल सेना में रहने का मौका मिलेगा और सेवानिवृत्ति के फौरन बाद हरियाणा में सरकारी नौकरी मिल जाएगी। ऐसे में यह घाटे का सौदा नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने तो यह संदेश देकर उनको पुनर्विचार करने को विवश कर दिया कि उन्हें हरियाणा पुलिस में भी नौकरी दी जाएगी। उपरोक्त भर्ती को लेकर भारत सरकार का दृष्टिकोण क्या है उस पर विवाद हो सकता है परंतु मुख्यमंत्री ने उपरोक्त ट्वीट करके गर्म लोहे पर चोट कर उसे दूसरी दिशा देने की कोशिश की है यह उनकी परिपक्व सोच को इंगित करता है।

अब उनका राजनीतिक समायोजन देखिए, सोमवार को मुख्यमंत्री गुड़गांव जो उनका लोकप्रिय डेस्टिनेशन है, में जाट धर्मशाला पहुंचे जाटों से माला डलवाई उन्हें खुश करके एक खास संदेश देने का काम कर दिया फिर अचानक रोहतक पहुंच गए जहां भाजपा के हरियाणा मामलों के प्रभारी विनोद तावडे ने बीच-बचाव कर कथित तौर पर मुख्यमंत्री और रोहतक के सांसद डॉ अरविंद शर्मा के बीच में एक तरह से सुला सुलह करा दी। डॉ अरविंद शर्मा अपने मकसद में कामयाब होते दिख रहे हैं तो मुख्यमंत्री भी इस प्रगति से संतुष्ट हुए होंगे अब यह मानकर चला जा सकता है कि पहरावर की उपरोक्त जमीन संबंधित संस्था को मिल जाएगी। जरूरी औपचारिकताएं जल्दी पूरी कर ली जाएंगी । मुख्यमंत्री को पता था कि यह मध्यस्थता सोमवार को नहीं हुई होती तो पूर्व घोषणा के अनुसार अगले दिन मतलब आज डॉ अरविंद शर्मा को इस प्रकरण में धरना देने मतलब आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ता । इस बात में कोई दो राय नहीं है कि डॉ अरविंद शर्मा इस बात से पीछे हटने वाले नहीं थे।

कहते हैं कि विनोद तावडे बीच में पड़ मामले को समझाने में सफल हो गए और अब डॉ अरविंद शर्मा मुख्यमंत्री को लेकर पहले की तरह आक्रामक नजर नहीं आएंगे। उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति में कुछ खास संदेश पहले ही दे दिए हैं। अब ऐसा लगता है कि कुलदीप बिश्नोई का भारतीय जनता में पार्टी में शामिल होने का मामला खटाई में पड़ सकता है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी का एक बड़ा मकसद पूरा हो चुका है और अब कुलदीप बिश्नोई के लिए भारतीय जनता पार्टी प्राथमिकता हो सकती हैं परंतु भारतीय जनता पार्टी के लिए कुलदीप बिश्नोई अब प्राथमिकता नहीं है। पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री दिल्ली जाकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलकर आए तो राजनीतिक पर्यवेक्षकों का यह मानना था की वे कुलदीप बिश्नोई को लेकर भी कोई मार्गदर्शन प्राप्त करके आए होंगे और यदि हाईकमान से हरी झंडी मिल गई होती तो अब से पहले उसका असर निश्चित तौर पर नजर आ जाता।

लोग यह कहने लगे हैं कि कहीं कुलदीप बिश्नोई बीच में तो नहीं लटक गए हैं ।उनका राहुल गांधी को जन्मदिन पर बधाई संदेश भेजना और अब भी कांग्रेस की बात करते रहना एक नई कहानी कह रहा है । देखते हैं आगे आगे होता है क्या।

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